सावन महीने में मंगलवार को इस प्रकार से करें रुद्रावतार हनुमान जी की पूजा,जानिए इसका महत्व





गोरखपुर समाचार ब्यूरो 

श्रावण मास के मंगलवार का महत्व अधिक होता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की आर्धांगिनी मां गौरी के लिए मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। आपको सावन के मंगलवार को वीर हनुमान जी की भी आराधना करनी चाहिए। हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं। बजरंगबली की पूजा करने से भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि सावन में हनुमान जी की पूजा कैसे करनी चाहिए।  सावन में हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों को बजरंगबली, भगवान शिव की कृपा के साथ ही भगवान श्रीराम तथा माता सीता की भी कृपा प्राप्त होती है। जब भी आप हनुमान जी की पूजा करें, तो साथ में श्रीराम और माता सीता जी की भी आराधना करें। ऐसा करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं क्योंकि प्रभु श्रीराम हनुमान जी के आराध्य हैं और सीता जी उनकी माता हैं।

 मंगलवार को हनुमान जी की पूजा विधि 

आज के दिन प्रात:काल स्नान आदि से निवृत होकर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद हनुमान जी की पूजा का संकल्प लें। अब हनुमान जी, श्रीराम और भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें। सबसे पहले भगवान श्री राम की पूजा करें। उसके बाद हनुमान जी को पुष्प, अ​क्षत्, चंदन, धूप, दीप, बूंदी के लड्डू आदि अर्पित करें। उनको सिंदूर भी चढ़ा सकते हैं। फिर शिव जी को भांग, धतूरा, मदार, बेल पत्र, भस्म आदि ​अर्पित करें। इसके पश्चात हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, राम रक्षा स्तोत्र और सुंदरकांड का पाठ करें। अब अंत में हनुमान जी आरती करें। पूजा के अंत में हनुमान जी अर्पित किए गए फल, मिठाई आदि को प्रसाद स्वरूप परिजनों में बांट दें। अन्य वस्तुएं किसी ब्राह्मण को दान कर दें।



धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की पूजा में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना जरूरी होता है क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं। हनुमान जी की पूजा मुख्यत: मंगलवार और शनिवार को किया जाता है।


क्रेडिट -दैनिक जागरण 

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